आशाए ग्रह भृमण के दौरान समझा रही नवजात का ख्याल रखना

कासगंज :


-कई बाधाओं के बावजूद अपने काम को पूरी कर्मठता से कर रहीं आशाएं।

-शुरुआती दिनों में आईं दिक्कतें, लोगों से सामंजस्य बनाकर काम शुरू किया।

स्वास्थ्य विभाग की बुनियाद कहीं जाने वाली आशाओं ने नवजात ने एक नई जिम्मेदारी संभाल ली है। आशाएं ग्रह भ्रमण के दौरान नवजात शिशुओं के ख्याल रखने के टिप्स भी दे रही हैं। इस कार्य में आशाओं को काफी मुश्किलों से दो-चार भी होना पड़ा। परन्तु, इन्होंने हार नहीं मानी। 

जिले के नगला वाहिदपुर निवासी आशा सावित्री ने बताया कि प्रसव के बाद नवजात की बेहतर देखभाल की जरूरत बढ़ जाती है। सरकारी अस्पताल में प्रसव के मामलों में शुरूआती दो दिनों तक मां और नवजात का ख्याल अस्पताल में रखा जाता है। लेकिन गृह प्रसव के मामलों में पहले दिन से ही नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। शिशु जन्म के शुरूआती 42 दिन अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान उचित देखभाल के अभाव में शिशु के मृत्यु की संभावना अधिक होती है। (एचबीएनसी) यानि गृह भृमण के दौरान आधारित नवजात देखभाल करती है। सावित्री ने बताया कि प्रसव से पहले से तैयारी करती हैं। सरकारी अस्पताल एवं गृह प्रसव दोनों स्थितियों में आशा घर जाकर 42 दिनों तक नवजात की देखभाल करती है। गृह भृमण के दौरान नवजात की देखभाल के बारे मे मां को बताती हैं। 

2019 से फरवरी तक कुल 75 डिलेवरी कराई है। सरकारी अस्पताल में43हुई है और प्राइवेट व घर में अब तक 32 हुई हैं। उन्होंने कहा कि शुरू में बहुत परेशानी हुई थी। लोग बात करने या सुनने को तैयार नहीं होते थे। अब तो खुद चलकर बता करते है

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 संस्थागत प्रसव में 6 एवं गृह प्रसव में 7 भ्रमणे

-फिरोजपुर की आशा सरोज बताती है कि ग्रह भृमण के दौरान वे संस्थागत एवं गृह प्रसव दोनों स्थितियों में गृह भ्रमण कर नवजात शिशु की देखभाल करती है। संस्थागत प्रसव की स्थिति में 6 बार गृह भ्रमण करती है। इसमें जन्म के 3, 7, 14, 21, 28 एवं 42 वें दिवस पर भ्रमण का कार्य होता है। गृह प्रसव की स्थिति में सात बार गृह भ्रमण करती है। इसमें जन्म के 1, 3, 7,14, 21, 28 एवं 42 वें दिवस पर यह भ्रमण होता है। इसलिए गृह आधारित देखभाल जरूरी है।

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इन लक्षणों को नहीं करें अनदेखो

-सही समय पर नवजात की बीमारी का पता लगाकर उसकी जान बचाई जा सकती है। इसके लिए खतरे के संकेतों को समझना जरुरी होता है। खतरे को जानकर तुरंत शिशु को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।  

1- शिशु को सांस लेने में तकलीफ हो 

2- शिशु स्तनपान करने में असमर्थ हो 

3- शरीर अधिक गर्म या अधिक ठंडा हो 

4- शरीर सुस्त हो जाए

5- शरीर में होने वाली हलचल में अचानक कमी आ जाए 

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गृह भ्रमण के दौरान पूछती है यह सवाल

1. सभी नवजात शिशुओं को अनिवार्य नवजात शिशु देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराना एवं जटिलताओं से बचाना

2. समय पूर्व जन्म लेने वाले नवजातों एवं जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की शीघ्र पहचान कर उनकी विशेष देखभाल करना

3. नवजात शिशु की बीमारी का शीघ्र पता कर समुचित देखभाल करना एवं रेफर करना 4. परिवार को आदर्श स्वास्थ्य व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना एवं सहयोग करना 5. मां के अंदर अपने नवजात स्वास्थ्य की सुरक्षा करने का आत्मविश्वास एवं दक्षता को विकसित करना।

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बीपीएम प्रेम कुमार ने बताया कि नवजात देखभाल सप्ताह के दौरान आशाओं द्वारा किए जा रहे गृह भृमण नवजात देखभाल पर अधिक जोर दिया गया है। इसके लिए आशाओं को निर्देशित भी किया गया है कि वह गृह भ्रमण के दौरान नवजातों में होने वाली समस्याओं की अच्छे से पहचान करें एवं जरुरत पड़ने पर उन्हें रेफर भी करें। आशाएं गृह भ्रमण के दौरान न सिर्फ बच्चों में खतरे के संकेतों की पहचान करती है बल्कि माताओं को आवश्यक नवजात देखभाल के विषय में जानकारी भी देती हैं।

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