घर-घर जाकर पुरुष नसबंदी के लिए आशा लक्ष्मी दे रही हैं सलाह

अलीगढ़ :–

•नसबंदी कराकर विजय कुमार ने निभाई एक अहम भूमिका, अब दूसरों को भी कर रहे हैं प्रेरित

•बच्चों में अंतर रखने के लिए सबसे सरल व सुरक्षित तरीका है 


जनपद के इगलास ब्लॉक स्थित गांव हस्तपुर के विजय कुमार ने खुद की नसबंदी करवा कर परिवार नियोजन में अहम भूमिका निभाई है। 35 वर्षीय विजय कुमार बस ड्राइवर हैं और उनके दो बच्चे हैं। उनका कहना है कि अब वह आगे बच्चा नहीं चाहते। इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी से सलाह लेकर पुरुष नसबंदी कराने का फैसला लिया। जिसमें उनकी मदद गांव की आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी ने की। आशा की मदद से पुरुष नसबंदी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर किया गया। परिवार नियोजन का यह स्थायी साधन अपनाने के बाद वह अन्य पुरुषों को प्रेरित कर रहे हैं।

आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी ने सिर्फ विजय की ही नहीं बल्कि गांव के अन्य तीन पुरुषों को भी नसबंदी कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जनसंख्या पखवाड़ा एवं शिविर के दौरान चार पुरुष व एक महिला नसबंदी करवाती। आशा कार्यकर्ता के सहयोग से ही गांव में परिवार नियोजन कार्यक्रम में अब लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा भी ले रहे हैं। 28 वर्षीय लक्ष्मी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर हस्तपुर पर 6 जून वर्ष 2019 से कार्यरत है। परिवार नियोजन साधन में 3 अंतरा व 6 आईयूसीडी तथा 5 पीपीआईयूसीडी, 4 पुरुष नसबंदी एवं एक महिला नसबंदी कराकर, उन्होंने गत वर्ष अप्रैल से अगस्त माह तक जिले की अन्य आशाओं के मुकाबले सबसे ज्यादा पुरूष नसबंदी करा-कर एक मिसाल कायम की है। 

इगलास ब्लाक के जिला ब्लाक कम्युनिटी प्रोग्राम मैनेजर अफरोज नबी ने बताया कि आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी पुरुष नसबंदी के फायदे बताकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। वह लोगों को बताती हैं कि पुरुष नसबंदी परिवार नियोजन के स्थायी साधन में सबसे सरल और सुरक्षित उपाय है। इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। यह सिर्फ 10 मिनट में हो जाती है और 30 मिनट के बाद पुरुष घर भी जा सकते हैं। 

यूपीटीएसयू के परिवार नियोजन विशेषज्ञ ने कहना है कि पुरुष नसबंदी करवाने में किसी भी तरह की हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। इस बात को लेकर आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी अपने क्षेत्र की अन्य आशाओं को भी प्रयोत्साहित करती हैं। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2022-23 में अप्रैल से अगस्त माह के बीच कुल 22 पुरुष नसबंदी हुई है। जिसमें से 13 नसबंदी इगलास ब्लॉक के पुरुषों ने करवायी। इसमें सबसे ज्यादा आशा कार्यकर्ता लक्ष्मी के द्वारा प्रेरित थी।

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